| डॉलर की मजबूती से पिघलने लगी हैं धातुएं | | रामवीर सिंह गुर्जर / नई दिल्ली October 28, 2010 | | | | |
डॉलर मजबूत होने का असर धातुओं की कीमतों पर दिखने लगा है। धातु विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत डॉलर से धातुओं की कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हो गया है। उनके मुताबिक ऊंचे स्तर पर बिकवाली के कारण भी धातुओं के दाम घटने लगे हैं और आगे भी कीमतों में नरमी बरकरार रह सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि धातुओं के दाम तेज होने के कारण नये स्मेल्टर चालू हो गए है, जिससे उत्पादन बढऩे से बाजार में सप्लाई अधिक होगी। साथ ही मुख्य उत्पादक और उपभोक्ता देश चीन द्वारा मौद्रिक नीति कठोर करने से धातुओं की मांग ठंडी पडऩे लगी है। ऐसे में आगे धातुओं के दाम घटने के आसार है। लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) में तीन दिनों के दौरान तांबे के दाम 8,500 डॉलर से घटकर 8,344 डॉलर, एल्युमीनियम के दाम 2,391 डॉलर से घटकर 2,313 डॉलर, निकल के दाम 23,775 डॉलर से घटकर 22,925 डॉलर, जस्ता के दाम 2582 डॉलर से घटकर 2541 डॉलर प्रति रह गए हैं। धातु विश्लेषक अभिषेक शर्मा बताते है कि चीन द्वारा मौद्रिक नीति कठौर करने से मांग घट रही है। दरअसल कठोर नीति से ऑटो सेक्टर की रफ्तार कम होने मांग घटने लगी है। सितंबर महीने में चीन का तांबा आयात 3 फीसदी घटकर 3,68,410 टन और एल्युमीनियम का आयात 9.4 फीसदी घटकर 65,772 टन रहा है। घटता आयात चीन की ओर से धातुओं की कमजोर मांग को दर्शाता है। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक भी रुपये में हो रही बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठा सकता है। शर्मा का कहना है एलएमई में अधिकतर धातुओं का भंडार फिर से बढऩे लगा है। ऐसे में बाजार में आने वाले दिनों में धातुओं की कीमतें नरम रहने वाली है। विश्लेषकों का कहना है कि अधिकतर धातुओं का बाजार में सरप्लस है। इंटरनेशनल जिंक ऐंड लेड स्टडी ग्रुप के मुताबिक सीसे का बाजार में 42000 टन और जस्ते का 1.66 लाख टन सरप्लस है। धातुओं के सरप्लस की बात से शर्मा भी इत्तेफाक रखते है। |
No comments:
Post a Comment